Thursday, 10 May 2012

"Bhrashtaachaar Ki Paribhaashaa"

क्या भ्रष्टाचार अपराध की श्रेणी में आता है..??
" ये भ्रष्टाचार किस पंछी का नाम है.."


" भ्रष्टाचार द्वीशाब्दिक युग्म है:--
  भ्रष्ट + आचार 
  भ्रष्ट समानार्थ है दूषित के 
  आचार समानार्थ है आचरण के
  भ्रष्टाचार समानार्थ है दूषित आचरण के.."


" दूषित आचरण के व्यवहार का कर्ता,
  भ्रष्टाचारी है.."


" जिस व्यक्ति का आचार-व्यवहार पतित हो,
  भ्रष्ट व्यक्ति है.."


" विधिविरुद्ध आचरण का कृत्य भ्रष्टाचार है.."


" व्यक्ति जो संविधानिक अधिनियम में निर्दिष्ट 
  उपबंध, उपबंधों के अंतर्गत विधिविरुद्ध व 
  दूषित आचरण का कर्ता, कर्तृत्व अथवा 
  कारयिता हो, भ्रष्टाचार के अपराध का दोषी है.."


" विधिविरुद्ध अथवा अवैधानिक कृत्य से 
  भ्रष्टाचार का निकट सम्बन्ध है, सिद्ध होता 
  है की भ्रष्टाचार अपराध है न की दुष्कृति.."


" कोई शरीर किसी पद्विशेष जो की 
  उच्चोच्च क्यों न हो यदि मानव का है एवं 
  निर्दिष्ट वैधानिक उपबंध, उपबंधों का हनन सह 
  अतिक्रमण या विलोपन का कर्ता, कर्तृत्व,
  कारयिता है या उत्प्रेरक-उत्प्रेरित है, अपराधी है.."
  

----- || DHARMNIRPEKSHATAA || -----

THURSDAY, JUNE 14, 2012                                                                                               

   "धर्म द्विशाब्दिक युग्म है :--
    धर्म+निरपेक्ष 
    धर्म = धार्मिक विचार विशेष,  विचारों का संकलन  
    निरपेक्ष = अपेक्षा रहित, उदासीन  
    धर्मनिरपेक्ष शब्द-युग्म  का भाव = धर्म विशेष के विचारों की अपेक्षा से रहित 
                        अर्थात सर्वधर्म सद विचारों से युक्त.."
   

" स्वजाति एवं स्वधर्माचरण के परायण का निर्वहन के सह पर-
  जाति व परधर्म के प्रति आदर व निरापदवलंबन  ही धर्म -
 निरपेक्षता है....."    


SUNDAY, JUNE 17 2012                                                                                              

" दया में ही धर्म निहित है ....."  


" स एष एक एकवृदेक एव....."
   ----- ।। अथर्ववेद ।। -----                                                                                                                         dr.neet107@gmail.com

"Raashtra Va Usaka Tantra"

राष्ट्र रूपी काय के मुख्यत: कौन से अंग होते है..??


वेदानुसार:-- " राष्ट्र के प्रमुख अंग है ,
                      मात भूमि, मात भाषा एवं संस्कृति.."


" राष्ट्र के सुसंचालन हेतु एक तंत्र की आवश्यकता होती है,
  विद्यमान विदित तंत्रों में परतंत्र व सैन्यतंत्र दमनकारी प्रवृत्ति 
  के निमित्त असफल रहे, राजतंत्र आधारभूत न्यूनताओं जैसे 
  की कार्यपालिका, व्यवस्थापिका व न्यायपालिका का 
  विकेंद्रीकरण, वंशवाद एवं आक्रमणकारी प्रवृत्ति के निमित्त 
  असफल हुवे व होते रहे; वर्तमान देशकाल परिस्थिति में 
  लोकतंत्र एक सफल तंत्र के रूप में अधिकाधिक राष्ट्रों द्वारा 
  मान्य व मनोनीत है.."


" एक लोकतांत्रिक राष्ट्र रूपी अवयव के प्रमुख तत्त्व है:--
  राष्ट्र की सीमाए ( भारत के सन्दर्भ में भारत की सीमाएं )
  राष्ट्र के निवासी ( भारतवासी )
  राष्ट्र का संविधान ( भारतीय संविधान ).."


" नीतियुक्त राष्ट्रिक पर्याय है नीतियुक्त राष्ट्र के,
  नितिमुक्त राष्ट्रिक पर्याय है नितिमुक्त राष्ट्र के.."


" नीतियुक्त राजन्य पर्याय है नीतियुक्त राजतंत्र के,
  नीतिमुक्त राजन्य पर्याय है नीतिमुक्त राजतंत्र के.."


" नीतियुक्त संविधान पर्याय है नीतियुक्त लोकतंत्र के..,
  नीतिमुक्त संविधान पर्याय है नीतिमुक्त लोकतंत्र के .."


" एक लोकतांत्रिक राष्ट्र के कुशल संचालन एवं दमनकारी 
  शक्तियों के प्रवेश नियंत्रण हेतु जनहिताकांक्षी, नीतिमान 
  नियंता, प्राविधिक प्रभावकारी, विधिप्राविन्य, सर्वसम्मत,
  संविधात़ा संतुलित, सशक्त, संधान संदिष्ट; संविधान की 
  आवश्यकता होगी....."

Wednesday, 9 May 2012

" Dharm' Kyaa Hai..??

  प्रश्न यह है की धर्म क्या है..??                                                                                  
  
" ईश्वर की उपासना से सम्बंधित पारलौकिक 
  सुख प्राप्ति का कर्मण, धर्म है.."


" चित एवं अचित के सृष्ट सत्तत्व में सृष्टि
  के सत्त्व की सेव्यस्तुति का स्तोम , उपासना है.."


" प्राणिमात्र में ईश्वर का अंश होता है,
  प्राणिमात्र की सेवा धर्म है.."


" उपासना सम्बंधित कर्त्तव्य विभिन्न  धर्मों 
  में भिन्न होता है.."


" धर्म, मानव जाति का मूलगुण निश्चित कर उसकी
  प्रकृति सुनिश्चित करता है.."


  वास्तव में " धर्म कदाचित सुविचित  सुविचारों के 
                    संचयन का स्थापित संग्राहलय है, जिसके 
                    अनुगमन, अनुशरण के परायण का कर्मण 
                    व्यक्ति, परिवार, समष्टि, समाज व राष्ट्र करता है.."


" विचारों की शिथिलता व हानि
  धर्म की शिथिलता व हानि है.."


" यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत
  अभुत्थानम धर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम 
  परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम
  धर्म संस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे....."
  -----11  श्री मद्भवद्गिता  11 -----
                  
                  
                  
    
  

'Aparaaadh' 'Dand' Va 'Kaaraavaas'

" संविधान में निर्दिष्ट अधिनियम के वैधानिक उपबंधों के 
  अतिक्रमण अथवा विलोपन का अवैधानिक कृत्य, 
  संविधान द्वारा स्थापित न्यायिक निकायों में सिद्धांतित 
  व अधिमान्य हो, अपराध है.."


" कुत्सित विचारों के कर्तृत्व परायण का विधिविरुद्ध प्रयोग, 
  अवैधानिक कृत्य है.."


" कुत्सित विचारों से सामाजिक सुरक्षा एवं ग्रसित व्यक्ति के 
  मानसिक परिवर्तन हेतु कारावास का दंड अपेक्षनिय व सर्वथा 
  उपयुक्त है.."


" जाति आनुवांशिक होती है,
  अपराध आनुवांशिक नहीं होता यह व्यक्ति के अवगुण रूप में
  प्रकृति स्वरूप होता है.."


'' दूषित आचरण व्यवहारी, विषय-प्रासंगिक व धृष्ट प्रकृति के 
  व्यक्ति के लिए विधि-विधान केवल मात्र हास-परिहास की  
  विषय-वस्तु है..''


'' Dushit Vichaaron Ke Mshtshk Ka Svaami Dusht Hotaa Hai,
  Dusht Sadaev Dandaniy Hotaa Hai..,


'' Dushit Vichaaron Ki Punaraavritti Aparaadh  Ko Dhrishtataa
  Kaarit Karati  Hai..,


'' Doshaaropan  Maatra Se Koi Vyakti Aparaadhi Nahi Hotaa
  Kintu Nyaayaalay Men Aarop Sddha Va Pramaanik Hone Ki
  Sthiti  Men Vyakti Aparaadhi Kahalaate Huve Dand Ka 
  Bhaagidaar Hotaa  Hai..,
  Bharatit Dand  Sanhitaa Ki Dhaaraa 53 Anusaar Dand Ke 
  Praaar Nimn Hai ;--
  1. Mriryudand
  2. AajivanKaaraavaas
  3. Kaaraavaas
  4. Kaaraavaas Do Prakaar Ke Hai
      I. Kadhor   II.  Saadhaaran
  5. Sampatti Ka Adhigrahan
  6. Arthdand..''


 'अपराध' व 'दुष्कृति' में अन्तर है:--
 अपराध सदैव दंडनीय है,
 दुष्कृति में क्षतिपूर्ति का प्रावधान है
 प्रश्न यह है की 'भ्रष्टाचार' अपराध है अथवा दुष्कृति.....?? 

"Sanvidhaan Ki Paribhaasaa"

" राष्ट्र के सुसंचालन हेतु राष्ट्र इकाई द्रारा आवश्यक सैद्धांतिक व मौलिक
  नीति-नियमों के निर्माण की क्रमबद्ध सूची  , संविधान है .."


" भारतीय संविधान के मुख्यत: पांच अंग है:--
  कार्यपालिका 
  विधायिका,
  न्यायपालिका,
  बाह्य सुरक्षा उपतंत्र अथवा सैन्य उपतंत्र,
  आतंरिक सुरक्षा उपतंत्र,
  बाह्य एवं आतंरिक सुरक्षा उपतंत्र कार्यपालिका एवं विधायिका के अधीन है.."


" जहां न्यायपालिका में न्याय अयोग व्यवहृत होने लगे,
  वहां संविधान निष्फल होने लगता है एवं लोकतंत्र की 
  असफलता का आरम्भ हो जाता है....."


" भारत सहित अधिसंख्य राष्ट्रों के लोकतंत्र में संसद या संसद सदृश्य संस्था
  जनता के मताधिकार के प्रयोग पर अवलंबित है, संसद अस्तित्वहिन होगी
  यदि राष्ट्र के नागरिक मत प्रयोग न करें; कार्यपालिका, विधायिका, न्याय -
  पालिका की प्रकल्पना संसद के अनस्तित्व पर अनुलंबित है..,
                                                  मताधिकार संसद के समर्थन के सादृश्य है;
  संसद का समर्थन, संविधान व लोकतंत्र का समर्थन है किन्तु निर्वाचित जन-
  प्रतिनिधियों को ऐसा कोई प्राप्ताधिकार नहीं है जिससे वह संसद, संविधान ,
  या लोकतंत्र का समर्थन कर सकें..,

  स्पष्टीकरण 1:--ऐसे प्रत्येक भारतीय मतदाता निर्वाचित जनप्रतिनिधियों
                          पर टिपण्णी का अधिकार सुरक्षित करता है..,
  स्पष्टीकरण 2:--मतदान की अनिवार्यता का आशय संविधान का अनिवार्य
                          समर्थन से है, संविधान तदर्थ निर्दोष नागरिकों के प्राण तक
                          क्यों न हर ले, संसद मताधिकार को कर्त्तव्य परक विधेयक
                          के रूप में निर्मित कर सकती है, जिसके परिपालन में बाह्य
                          व आतंरिक सुरक्षा का बलपूर्वक दुरुपयोग कर सकती है.."

'' भारतीय संविधान में जनता प्रत्याशी के सह अप्रत्याशित रूप से दल का 
  चुनाव भी करती है जबकि संविधान में दल के चुनाव का प्रावधान ही नहीं है.....'' 
                       
                       
  
भ्रष्टाचार के कृत्यकार कौन कौन हो सकते है ..??