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Thursday, 26 March 2020

-----|| GYAAN-GANGAA || -----,

===> ''क्षुधा प्राणवान का प्रथम रोग है भोजन उसकी औषधि है.....'' 
===>'' उदर की अग्नि भोजन से शांत होती है धन से   नहीं.....''

Saturday, 10 January 2015

----- ॥ ज्ञान -गंगा ॥ -----

" आत्महत्या यद्यपि एक अपराधिक कृत्य है तथापि वह  दंडनीय नहीं है ॥ यह एक समस्या है कार्य कारन व् निवारण ही इसका समाधान है "  


करतन कारन फल संग जग अपकीरिति होइ । 
बय भय सँग स्वनिर्यनै ,प्रान हनै निज कोइ ।२२३९ । 
भावार्थ : -- कोई व्यक्ति जब किसी कार्य कारण व् परिणाम द्वारा जग अपकीर्ति  के भय से अथवा परिस्थियों के वशीभूत आत्म निर्णायक होकर स्वयं को मृत्यु का दंड देता है उसे आत्महत्या कहते हैं । 
स्पष्टीकरण १ : -- आत्महत्या का नाटक एक दंडनीय कृत्य है 
स्पष्टीकरण २ : -- कार्य कारण यदि विधि द्वारा विहित उपबंधों में कोई अपराध है तब अभियुक्त उतने दंड का ही भागी होगा.....

यह विडंबना ही है कि भारत में एक किसान इस हेतु आत्महत्या करता है कि शासकों ने उसकी धरती अधिग्रहित  कर ली अपने कृत्य में असफल होने पर उसे ऐसे संत्रास के संग न्यायालय दंड भी देगी । 

दूसरा किसान  ऋण ग्रस्त होकर आत्महत्या करता है असफल होने पर उसे ऋण भी देना होगा और दंड भी भोगना पड़ेगा अर्थात शासक किसानों को सभी ओर से मारने पर उतारू है ..... 

Sunday, 16 September 2012

----- ।। सुसंस्कृतम् ।। -----

विकृत संस्कृति का वैचारिक परिवर्तन धन-बल से नहीं अपितु
ज्ञान एवं बुद्धि से संभव है.....



Thursday, 30 August 2012

-----।। ज्ञान-गंगा ।। -----

"ज्ञान रूपी धारा, विशुद्ध चरित्र के रज पर सतत प्रवाहित होती है"

 "अशुद्धता का पाषाण प्रवाह को बाँध लेता है  प्रवाहित नीर एवं ज्ञान सदैव शुद्ध रहता है"


" मनुष्य एक शक्तिशाली प्राणी है,प्रकृति के चित्रपटल पर वही
  दृश्य उभरता है जिसका वह दर्शनाभिलाषी है"


" अर्धांगनी प्राय: आयु पुछ कर आती है किन्तु मृत्यु  आयु पुछ
  कर नहीं आती"
  

 

Tuesday, 21 August 2012

----- ।। चार - विचार ।। -----

" अंतरज्ञान ज्योत-प्रकाश के प्रसारण का सुगम साधन वाणी वाद, वर्ण वर्तनी
  एवं विषय वर्णन इत्यादी हैं भाषा विचार अभिव्यक्ति का सबसे सरल माध्यम है....."