मुझको ख़बर है तेरी क़त-ए-कलम कालिख की..,
इस कारकरदा का तू भी तो इक किरदार है..,
कदे-कतार का सजदा करें या के तोहमत दें..,
गुल दस्त-ब-दस्त हैं और कफे-कारबार है.....
" कूटकोण एवं कूटकारों द्वारा लोकतंत्र एव लोकनीति का संचालन नहीं होता,
इससे केवल 'राजतंत्र' व 'राजनीति' ही संचालित होती हैं; राजनीति में
साम दाम दंड भेद का प्रयोग कर एक शक्तिशाली दुसरे शक्तिशाली का दमन
का 'लोकप्रिय' नियम है....."
राजनैतिक दलों द्वारा राजनैतिक चमक दमक हेतु देश,प्रदेश अथवा स्थानीय
स्तर पर किसी भी प्रकार का बंद के आयोजन के फलस्वरूप ह्तभागी को
यथाक्रम संसद, विधायिका अथवा स्थानीय निकायों को बंद कर देनी चाहिए.....
गुलामे-हिन्दुस्ताँ को फ़तेह शाने-सर दिया.., सर जमीं आजादे-हिन्दुस्तान कर दिया.., जहां जमीन गुल जो गुलामी पे लुट गए .., सफ़र कदम हमने इक निशाँ कर दिया.., जलजलों के जलवे ने कुश्ता किया चराग.., जवान जलजलों ने शम्मेदान सर दिया.., जुल्मे जहन्नुम में जलाया फिरारी ने फिरदौस को जलाके शमशान कर दिया.., जहान्नारा जान पे जाँ निसार कर चले.., जवाँ जवाँ जवानों बागबान कर दिया.., शहाब की रंगीनी शहादते शबीह पर.., सर अंजाम सरापा शहीद शहान बर दिया.., जुलमते मुल्क के शाख्शान पे शहीद.., पाकिज़ा जर्रे को हमने लो पेशान पर दिया.....
जिस संसद में जनता के जीवन-मरण के प्रश्न निर्धारित होते हैं उस संसद का
विद्यमान स्वरूप क्रीडास्थल एवं छविग्रह के सदृश हो गया है मानो वह अदृश्य
असुर शक्तियों द्रारा नियंत्रित हो रहा है.....
----- ।। स्वतन्त्र - स्वरतंत्र ।। ----- " स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारत का शासन प्रबंध यथानुक्रम उन दलों के अधीन रहा जिनको राम-रहीम अथवा धर्मनिरपेक्ष जैसे शब्दों से कोई सरोकार नहीं रहा, महात्मा गांधी की विचारधारा इनके शब्दकोष में विलोपित है.."
SATURDAY, AUG 04, 2012
" विद्यमान संवैधानिक संकलन की संरचना संसद निर्माण के पूर्व हुई थी; संसद, संसदीय व्यवस्था का एक संकल्पित अंश है.."
" मार्ग सदैव एक होता है, मनुष्य का चरण-आचरण उसके लक्ष्य की दिशा निर्धारित करता है.." SUN/MON, AUG 05/O6, 2012
भारतीय एतिहासिक एवं प्रोगेतिहासिक शासकों ने तात्कालिक युगपुरुषों का पूजन प्रदर्शन कर सदैव वैदेशिक शक्तियों को आकर्षित किया वैदेशिक शक्तियों ने कला संस्कृति एवं व्यापार की लुभावनी छवि प्रस्तुत की,अंग्रेज सर्वाधिक चतुर प्रमाणित हुवे जिन्होंने दीर्घावधि पर्यंत भारत को बांधे रखा....." एक विधि स्नातक युवक की जीवन धारा को लौह पथ गामिनी के अंतर प्रकरण ने परिवर्तित कर दिया नाम था मोहन दास करम चंद गांधी, सत्य अहिंसा अनशन धरना प्रदर्शन का दक्षिण अफ्रिका में सफलतम प्रयोग कर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के भवन की वास्तविक नींव रखी..... श्रीराम चन्द्र ने मात्र एकतीस तीरो से रावण का वध कर दिया इन्हीं के जीवन चरित्र से प्रेरणा ले केवल मात्र एकतीस वर्षों के सक्रीय आन्दोलनों के फलीभूत भारत को अंग्रेजों के बंधन से मुक्त कराया.....
छलावे के नीर पर नेंतिकता की नौकाएं विचरित नहीं होती..''
स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात वेगमय शासन शक्ति के सह लेखनियाँ सतत प्रवाहित होती रही, इस ज्ञानाभाव के कि प्रवाह नल है, नलिका है,नाला है नदि है, अथवा गंगा है.....'' मुझ संकाश नहु सज्जन, दुर्जन के विचार । मुझ नीकाश नहु दुर्जन, सज्जन का आचार ।।.....( 08 अगस्त ) गुरूवार, 09 अगस्त, 2012
विधि का विषय विशेष, विशिष्ट वाग्विदग्ध एवं वाग्विभव हेतु है..... जिनसे एक तुच्छ सिंहासन नहीं छुटता उनसे ये जीवन कैसे छुटेगा.....