Thursday, 30 August 2012

-----।। ज्ञान-गंगा ।। -----

"ज्ञान रूपी धारा, विशुद्ध चरित्र के रज पर सतत प्रवाहित होती है"

 "अशुद्धता का पाषाण प्रवाह को बाँध लेता है  प्रवाहित नीर एवं ज्ञान सदैव शुद्ध रहता है"


" मनुष्य एक शक्तिशाली प्राणी है,प्रकृति के चित्रपटल पर वही
  दृश्य उभरता है जिसका वह दर्शनाभिलाषी है"


" अर्धांगनी प्राय: आयु पुछ कर आती है किन्तु मृत्यु  आयु पुछ
  कर नहीं आती"
  

 

Wednesday, 29 August 2012

----- ।। मान न मान ।। -----














 दंड    चारी   चक्र   व्यूह   दंडाधिप   देवकुल ।
 धर    धारणा  धार  ध्रुव  पाल  पाश   पांशुल ।।                               

दंड भोगी भय कृत  विकल्प विधि वध वधिक ।
दंडानीक    दण्डित  दंडी    दंडिका      दंडिक ।।

----- ।। न्याय का कार्यक्रम ।। -----

" लोक, राज, पर, सैन्य अथवा किसी भी तंत्र का उचित या अनुचित न्यायधिकरण जन
  संचालन का आधार स्तम्भ होता है "


" काय-कार-काल के कार्य-कारण न्याय का परिमाण एवं औचित्य परिवर्तित कर देते है"


             

Tuesday, 28 August 2012

----- ।। न्याय का क्रियाकर्म ।। -----

" भारत की  विद्यमान  संसदीय  प्रणाली  में  कार्यपालिका,
  न्यायपालिका का संचालन कर रही है एवं न्यायपालिका
  का ये दोनों ही प्रशासन को नियंत्रित कर रहे हैं क्या द्वैध
  शासन प्रणाली का यही स्वरूप है-----" 

" महात्मा गांधी की ह्त्या अंग्रजों के शासन काल में न होकर
  नेहरू के शासन काल में हुई सुभाष चन्द्र बोष विलुप्त रहे, देश
  की आतंरिक सुरक्षा प्रणाली पर उक्त शासन से किसी  ने  भी
  कोई गंभीर प्रश्न नहीं पूछा; आश्चर्य है !!!" 

Monday, 27 August 2012

----- ।। मान न मान ।। -----


                                         नील वसन  आधार  धर  उत्तर  उत  निरवास ।
                                         बहु  व्यसन  देश  बाहर   महामात्य    प्रवास ।।

                                         सिंहासन  मणि  सोपान  बहु  रूप  रस रंगीन ।
                                         भोज भोजन भोग  वान  नक्त  दिन  नक्तंदिन ।।

                                         नीव नीव नीवानास नील मणि शिख शिखण्ड ।
                                         नृप  निति  पथ  सभा  सुत  नृशंस  नंगधडंग ।।

                                         ध्वज  धर  पट  ध्वजाहृत  धृष्ट  दीधिति राष्ट्र ।
                                         धूर्त  कितव  कृत्य  चरित दुष्ट  धृति  धृतराष्ट्र ।।

                                         धनुर्धर  धर्म  सभा सुत धनञ्जय धारि धार ।
                                         ध्वजीनी  धर्म  युद्ध  युत  संहित सहाय सार ।।  

  

Sunday, 26 August 2012

-----।। सांसद की सांस ।। -----

" सांसदों को चलचित्र  के ऐनक लगाकर संसदीय छविग्रह से  राष्ट्र की  प्रत्येक
  महिला चित्रान्गना एवं पुरुष "गड्डमगोल अर्थात  क्रिकेट क्रीडिता" के  सदृश
  दिखाई दे रहें हैं, महात्मा गांधी का ऐनक को तो कहीं 'संग्राहलय वन्ग्राहलय"
  में फेंक रखा है....."


" आनेवाले वर्षों के चुनावों का प्रश्नपत्र अत्यधिक  कठीन होगा हल कर  उत्तीर्ण
  करना 'दलीय विद्यार्थियों' के लिए  अत्यधिक दुरूह होगा, परीक्षा के परिणाम
  के  पूर्वानुमान  का  सटीक  व्याख्याकार 'विषय विशारद विशेष ' के  विभूषण
  योग्य हो सकता है....."

                  

Friday, 24 August 2012

----- || घीसा-न्याय--पिटा-न्यायालय ।। -----

" स्वतंत्रता प्राप्ति के पूर्व भी न्यायिक व्यवस्था थी किन्तु व्यवस्थित नहीं थी,
  फलस्वरूप अंग्रेज को भारत छोड़ना पड़ा कारण  व्यापक  जनविरोध  रहा
  वर्त्तमान न्यायिक व्यवस्था का आधार भी प्राचीनतम ही है....."


" न्याय उपलब्धता के प्रश्न पर आम भारतीय नागरिक का उत्तर नकारात्मक
  ही होगा तथापि विद्यमान न्यायिक व्यवस्था के प्रति  अंधश्रद्धा  दर्शनीय है....."