Sunday, 8 July 2012

----- || SANSAAR SAAR || -----

" आलोचना व अवहेलनाऐ सदैव उत्कृष्ट उद्धरण हेतु प्रोत्साहित करतीं हैं....."

" निंदक नियरे राखिये आँगन कूटी छबाए..,
  बिनु पानी बिनु साबुना निर्मल करे सुहाए....."
                          ----- ।। कबीर ।। -----


" सिद्धांत व व्यवहार, अध्यात्म व विज्ञान के द्वैध पक्ष हैं;
  अध्यात्म का सम्बन्ध आत्म रूप में व विज्ञान का
  सम्बन्ध दैहिक स्वरूप में है....."


TUESDAY, JULY 10, 2012                                                                      


" तुलनात्मक दृष्टिकोण की स्तुति की अपेक्षा अतुल्य
   दृष्टांत की प्रस्तुति का प्रस्तावक होना चाहिए....."


SUNDAY, JULY 15, 2012                                                                         


" योग्यता तब निश्चित होती है जब व्यक्ति वास्तव में योग्य हो.."


" परिभ्रष्ट अथवा क्लिष्ट कर्म से अर्जित धन के दान से श्रेष्ठ, उक्त कार्य का
  परित्याग है..,
  अर्थात : --
                   अनैतिक अर्जन ( ज्ञान, अर्थ इत्यादि ) के विसर्जन से उत्तम
                   अनैतिक कर्म का विसर्जन है..,

                   नीतिगत अर्जन का रितिगत विसर्जन( दान,धर्म आदि ) सर्वोत्तम है ..,
                 
                   गुप्त विसर्जन उत्तमोत्तम है....."

SATURDAY, JULY 21, 2012                                                                       


" गुणों के मध्य कोई एक दोषारोपण खिन्न्न करता है,
  दोषों के मध्य कोई एक गुणगान प्रसन्न करता है;
  सत्य आलोचना श्रे ष्ढ व्यक्तित्व का निर्माण करती है.."
  किन्तु : --
                 सचिव बैद गुर तीनि जौं प्रिय बोलहिं भय आस ।
                 राजधर्म  तन   तीनि   कर  होइ  बेगिही    नास ।।
                                            ----- ।। तुलसीदास ।। -----



                

6 comments:

  1. प्रभावित हुआ |
    आभार ||

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  2. बिलकुल.....
    हम भी प्रभावित हुए...
    बहुत सुन्दर.

    अनु

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  3. बहुत बढ़िया!
    बस यही तो दिक्कत है कि शब्दपुष्टिकरण के लिए अनावश्यक समय नष्ट करना पड़ता है।
    खैर अब यहाँ आ ही गया हूँ तो यह दिक्कत भी झेल लेता हू।

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  4. चर्चामंच के माध्यम से आपके यहाँ आना हुआ, देख कर अत्यंत ख़ुशी हुई कि हिंदी के शब्दों का जो आपने भरपूर इस्तेमाल किया है, वो वाकई काबिल-ए-तारीफ है!
    आपको फोल्लो करने लगा हूँ तो अब आता रहूँगा आपको पढने समय समय पर!

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  5. बहुत सुंदर है !!
    चर्चामंच के माध्यम से आपके यहाँ आना हुआ

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