Friday, 5 August 2016

----- ॥ टिप्पणी १० ॥ -----

>> प्रतिदिन छत पर थोड़े से दाने व कसोरे में पानी रखिए फिर देखिये,
आपके घर के आसपास, कौंवा,चिड़िया,कबूतर कोयल गाने लग जाएंगी

राजू : --हाँ और आप घर बैठे कवि बन जाएंगे वो भी बड़े वाले.....
            किसी गधे की छोटे छोटे पॅकेज वाली नौकरी से तो येई ठीक है, 
            समझे होशियारों.....? अब आत्माह्त्या मत करना..... 

>> पोथि लिख लिख सबु कह मुए भयो न पंडत कोए ।
      ढाई आखर कर्म का कियो सो पंडित.....?

राजू :--होए.....

>> राजू बताओ किस गधे ने ऐसी पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा खम्बा कहा था : -
१) इस गधे ने २) उस गधे ने ३) इस उस गधे ने ४) इन सभी गधों ने

राजू :-- मास्टर जी! किसी खच्चर ने कहा था ?

अच्छा तू क्या है
राजू :- हरेक बात पे पूछते हो की तू क्या है

ख़्वाब हूँ बस नजरों में मिरा आशियाना है.., 
नींदे-गफलत के वाबस्ता ये गरीब ख़ाना है..... 
>> किसी धर्म विशेष के अनुयायायियों के आराध्य का जन्म स्थल तीर्थ स्थल होता है.....
एक सामान्य से मंदिर अथवा मस्जिद अथवा गिरजाघर में और एक तीर्थ स्थल में अंतर है.....

>> कितने बरस हो गए 'बाप जी' को खाट भोगते..... ?
     प्रतियोगी परीक्षाओं में अब ये प्रश्न पूछा जाने लगा है,
      उत्तर पूछने वालों को भी पता नहीं है.....


>> हिन्दू उपासना पद्धति मरुस्थल को भी वनस्थली में परिवर्तित करने में सक्षम है
राजू : -- हाँ परीक्षा के लिए किसी मरुस्थल में एक शिव लिंग भर स्थापित कर दो  फिर देखो भारतीय धार्मिक नारियां  सींच सींच कर  पीपल, वट, आंवला, नीम, बेल, कदम्ब, आम आदि वृक्षों से  कैसे उसे दोहरा  करती हैं.
>> भारत में अब भी मुसलामानों का ही राज है, काले नोट  पर लाल किले को देखकर ऐसा मेरे को ही लगता है की आप लोंग को भी लगता है.....?
>> ' अपनी सत्ता -अपनी मुद्रा ' अब देश इस मुद्रा व्यवस्था के लिए भी तैयार रहे....
>> १५ अगस्त, १९४७ यह तिथि इतिहास के काले पन्नों पर सत्ता के लालचियों द्वारा भारत के टुकड़े टुकड़े कर सत्ता प्राप्ति की तिथि के रूप में उल्लखित होगी.....

>> राजू ! पता है इन दिनों प्रधान मंत्री क्या कहते फिरते हैं..,?
      राजू : -- क्या मास्टर जी.., ?
      " काश ! मैं पुरुष होता..,
      राजू : -- किन्तु मास्टर जी ! चुनाव से पहले तो वे कहते थे की मैं महापुरुष हूँ.....

>> अपनी बिरादरी के सहयोग से पड़ोसी कश्मीर को मार्ग बना कर देश में अंतरस्थ हो गया है , और ई मंत्री जी सीमापार कर प्रोटोकॉल मांगने गए थे ?  घर में ही काहे नहीं दे दिए.....

 राजू : -- हाँ तो जब शत्रु अपने आस-पास हो , तो इधर-उधर जाने की क्या आवश्यकता.....


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