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Wednesday, 29 August 2012
Monday, 27 August 2012
----- ।। मान न मान ।। -----
नील वसन आधार धर उत्तर उत निरवास ।
बहु व्यसन देश बाहर महामात्य प्रवास ।।
सिंहासन मणि सोपान बहु रूप रस रंगीन ।
भोज भोजन भोग वान नक्त दिन नक्तंदिन ।।
नीव नीव नीवानास नील मणि शिख शिखण्ड ।
नृप निति पथ सभा सुत नृशंस नंगधडंग ।।
ध्वज धर पट ध्वजाहृत धृष्ट दीधिति राष्ट्र ।
धूर्त कितव कृत्य चरित दुष्ट धृति धृतराष्ट्र ।।
धनुर्धर धर्म सभा सुत धनञ्जय धारि धार ।
ध्वजीनी धर्म युद्ध युत संहित सहाय सार ।।
Sunday, 26 August 2012
-----।। सांसद की सांस ।। -----
" सांसदों को चलचित्र के ऐनक लगाकर संसदीय छविग्रह से राष्ट्र की प्रत्येक
महिला चित्रान्गना एवं पुरुष "गड्डमगोल अर्थात क्रिकेट क्रीडिता" के सदृश
दिखाई दे रहें हैं, महात्मा गांधी का ऐनक को तो कहीं 'संग्राहलय वन्ग्राहलय"
में फेंक रखा है....."
" आनेवाले वर्षों के चुनावों का प्रश्नपत्र अत्यधिक कठीन होगा हल कर उत्तीर्ण
करना 'दलीय विद्यार्थियों' के लिए अत्यधिक दुरूह होगा, परीक्षा के परिणाम
के पूर्वानुमान का सटीक व्याख्याकार 'विषय विशारद विशेष ' के विभूषण
योग्य हो सकता है....."
महिला चित्रान्गना एवं पुरुष "गड्डमगोल अर्थात क्रिकेट क्रीडिता" के सदृश
दिखाई दे रहें हैं, महात्मा गांधी का ऐनक को तो कहीं 'संग्राहलय वन्ग्राहलय"
में फेंक रखा है....."
" आनेवाले वर्षों के चुनावों का प्रश्नपत्र अत्यधिक कठीन होगा हल कर उत्तीर्ण
करना 'दलीय विद्यार्थियों' के लिए अत्यधिक दुरूह होगा, परीक्षा के परिणाम
के पूर्वानुमान का सटीक व्याख्याकार 'विषय विशारद विशेष ' के विभूषण
योग्य हो सकता है....."
Wednesday, 22 August 2012
-----||सर्व विकार स्वीकार=सरकार।।-----
मुझको ख़बर है तेरी क़त-ए-कलम कालिख की..,
इस कारकरदा का तू भी तो इक किरदार है..,
कदे-कतार का सजदा करें या के तोहमत दें..,
गुल दस्त-ब-दस्त हैं और कफे-कारबार है.....
" कूटकोण एवं कूटकारों द्वारा लोकतंत्र एव लोकनीति का संचालन नहीं होता,
इससे केवल 'राजतंत्र' व 'राजनीति' ही संचालित होती हैं; राजनीति में
साम दाम दंड भेद का प्रयोग कर एक शक्तिशाली दुसरे शक्तिशाली का दमन
का 'लोकप्रिय' नियम है....."
इस कारकरदा का तू भी तो इक किरदार है..,
कदे-कतार का सजदा करें या के तोहमत दें..,
गुल दस्त-ब-दस्त हैं और कफे-कारबार है.....
" कूटकोण एवं कूटकारों द्वारा लोकतंत्र एव लोकनीति का संचालन नहीं होता,
इससे केवल 'राजतंत्र' व 'राजनीति' ही संचालित होती हैं; राजनीति में
साम दाम दंड भेद का प्रयोग कर एक शक्तिशाली दुसरे शक्तिशाली का दमन
का 'लोकप्रिय' नियम है....."
Friday, 17 August 2012
----- || SAN-SAN SANSAD || -----
राजनैतिक दलों द्वारा राजनैतिक चमक दमक हेतु देश,प्रदेश अथवा स्थानीय
स्तर पर किसी भी प्रकार का बंद के आयोजन के फलस्वरूप ह्तभागी को
यथाक्रम संसद, विधायिका अथवा स्थानीय निकायों को बंद कर देनी चाहिए.....
स्तर पर किसी भी प्रकार का बंद के आयोजन के फलस्वरूप ह्तभागी को
यथाक्रम संसद, विधायिका अथवा स्थानीय निकायों को बंद कर देनी चाहिए.....
Friday, 10 August 2012
----- || SAN-SAN SANSAD || -----
सन-सन संसद
जिस संसद में जनता के जीवन-मरण के प्रश्न निर्धारित होते हैं उस संसद का
विद्यमान स्वरूप क्रीडास्थल एवं छविग्रह के सदृश हो गया है मानो वह अदृश्य
असुर शक्तियों द्रारा नियंत्रित हो रहा है.....
जिस संसद में जनता के जीवन-मरण के प्रश्न निर्धारित होते हैं उस संसद का
विद्यमान स्वरूप क्रीडास्थल एवं छविग्रह के सदृश हो गया है मानो वह अदृश्य
असुर शक्तियों द्रारा नियंत्रित हो रहा है.....
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